Part 1
मै वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के द्वारा चयनित एक सहायक अध्यापक के रूप में चौधरी गजेन्द सिन्ह इण्टर कालेज सिम्हारा कासिम पुर जनपद जालौन उत्तर प्रदेश में कार्यरत हूँ. मेरी नियुक्ति दिसम्बर 2021 में हुई । इस समय मैं 51 साल की उम्र पार कर चुका हूँ । मेरा जीवन बडा ही कष्टमय रहा । मै एक गरीब परिवार से हूँ । मेरे पूजनीय माता पिता बहुत ही गरीब थे। किसी तरह मजदूरी करके अपना तथा अपने बच्चों का पालन पोषण करते थे । मेरे माता पिता के कुल पॉच सन्तान है । तीन पुत्र और दो पुत्री । उन तीन पुत्रो में मै दूसरे नम्बर पर हूँ । जैसा कि सभी पैरेन्टस की कोशिश रहती है कि अपने बच्चो को पढा लिखा कर उस योग्य बना दे जिससे कि बच्चे अपना जीवन सुचारू रूप से चला सके । इन्ही विचारधाराओं के साथ हमारे पैरन्टस ने भी अपने सभी बच्चों को स्कूल मे पढने के लिए एडमीशन करवाया । लेकिन मेरे किसी भाई बहन ने 8वी की परीक्षा भी नहीं पास कर पाये । जबकि मेरे माता पिता गरीबी झेलते हुए मजदूरी करके भरपूर प्रयास किए कि मेरे बच्चे पढ लिख कर कुछ योग्य बन जाय । जहां तक मुझे याद है कि जब मैं सन् 1981 मे कक्षा 4 मे पढ रहा था और मेरी वार्षिक परीक्षा पूरी हो गई थी उसी पीरियड मे एक दिन हमारे मौसा जी हमारे घर पर आये । हमारे मौसा जी सम्पन्न परिवार से थे । वे परिवार सहित बिहार मे रहते थे । उन्हें हमारे माता पिता की गरीबी देखकर अत्यन्त दुख हुआ और मेरे माता पिता से कहा कि आप अपना एक लडका (मुझे) मेरे घर पर रहने के लिए भेज दो मै उसे पढॉऊगा और अच्छे से रखूूगा । मेरे पैरेन्टस ने तो एक बार तो मना कर दिये। लेकिन फिर वो हमारे मौसा जी की बात मान गये और मुझे उनके साथ जाने की आज्ञा दे दी। और मै अपने मौसा जी के साथ उनके घर बिहार मे जाकर रहने लगा । वहॉ पर मौसा जी ने पढने के लिए मेरा एडमीशन स्कूल मे नहीं करवाया बल्कि उनकी लडकी को जो अध्यापक ट्यूशन पढाता था उसी से पढने के लिए कह दिया । मैं लगभग दो घण्टे ट्यूशन पढने के बाद फिर मैं उनकी दुकान पर काम भी करता था । इसी तरह लगभग एक वर्ष पूरा हो गया । वहॉ पर मेरा मन बिलकुल नही लग रहा था क्योंकि मुझे आगे भी पढाई करना था । फिर मैने मौसा जी से जिद किया कि मेरा मन नहीं लग रहा है मै अपने घर जाऊंगा । इस प्रकार मेरे जिद करने पर मेरे मौसा जी ने मुझे वापस मेरे घर भेज दिया। इसके आगे Part 2 में -
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